हार्दिक पटेल के बारेमे

हार्दिक पटेल के बारेमे

“हार्दिक पटेल एक भारतीय सामाजिक कार्यकर्ता हैं जिन्होंने पाटीदार आरक्षण आंदोलन में भाग लिया, शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षित कोटा के योग्य होने के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी में पाटीदार जाति को शामिल करने के लिए आंदोलन शुरू किया है ।”

मेरी यात्रा।

  • शैक्षिक पृष्ठभूमि
    आठवी कक्षा तक हार्दिक ने विरमगाम में दिव्यज्योति विध्यालय में अध्ययन किया। आठवी कक्षा के बाद आगे अध्ययन हेतु, वह के.बी.शाह विनय मंदिर गए। उनके पास वाणिज्य में स्नातक की डिग्री है | १९९८ में, उनके पिता, श्री भरत पटेल, अपने बच्चो की बेहतर शिक्षा के लिए वीरमगाम गए।
  • आंदोलन के पीछे का कारण
    मेहसाणा जिल्ले में प्रथम क्लास के साथ उनकी बहन, १२ वीं कक्षा पास की। वे मेरिट की तौर से प्रवेश पाने के बारे में बिल्कुल निश्चित थे। दुर्भाग्य से, अच्छे अंक प्राप्त करने के बाद भी वे प्रवेश पाने के लिए संघर्ष कर रहे थे क्योंकि वे आरक्षित श्रेणी में नहीं थे। वो आश्चर्य चकित थे की, वे ऐसे ही एक नहीं हैं जो इस तरह के अन्याय का सामना कर रहे थे। समस्या न केवल प्रवेश पाने में थी, लेकिन सरकारी नौकरियों में भी थी।
  • आंदोलन की शुरुआत
    २३ जुलाई २०१५ विसनगर रैली की सफलता के बाद, उन्होंने १४ अगस्त २०१५ को हिमत्तनगर में उन्होंने कलेक्टर के सामने आवेदन जमा करने की रैली का आयोजन किया, और १६ अगस्त २०१५ को विरमगाम में ईसी मुद्दे के साथ रेली की | १७ अगस्त २०१५ को सूरत में उनकी रैली में उन्हें लोगों का भारी मात्रा समर्थन मिला२३ अगस्त २०१५ को, उन्होंने वडोदरा में कलेक्टर के कार्यालयको एक आवेदन पत्र प्रस्तुत करनेका का फैसला किया
  • जुठे आरोप
    अपनी उभरती नेतृत्व की गुणवत्ता को देखते हुए, भाजपा सरकार ने गुजरात के लोगों को भड़काने के लिए १७ अक्टूबर २०१५ को सूरत में गलत राजद्रोह के अपराध के तहत गिरफ्तार किया। २३ अक्टूबर २०१५ को अहमदाबाद में, सरकार के खिलाफ विद्रोह में शामिल होने का झूठा दूसरा आरोप लगाया गया।
  • उभरती लोकप्रियता
    बढ़ती लोकप्रियता की वजह से उनके नाम का दर भाजपा सरकार को इतना हो गया था की, सरकारी कार्यक्रमों के बैनर, होर्डिंग्स और पुस्तिकाओं में हार्दिक शब्द का प्रयोग करना बंद कर दिया, जो उनके नाम का प्रतिक दिखता है। १३ जुलाई २०१६ को, गुजरात उच्च न्यायालय ने गुजरात के बाहर छह महीने रहने की शर्त पर जमानत जारी की। इस चीज़ की वजह से उनके समर्थको में ख़ुशी का माहौल चा गया था।
  • जब राजस्थान में थे
    उन्होंने वीरो की भूमि उदयपुर में ६ महीने बिताए थे। तब राजस्थान में भाजपा सरकार ने उनपे निगरानी रखने का आदेश दिया था और पुलिस के तंबू उनके निवास के बाहर जगह में डाले गए थे, जो बहुत ही आश्चर्यजनक बात थी। लेकिन उनकी लोकप्रियता इतनी भारी थी कि भारत के विभिन्न राज्यों के हर समुदाय के लोग वहां मिलने आए।
  • बचपन
    हार्दिक पटेल का जन्म गुजरात के एक हिंदू पाटीदार परिवार में २० जुलाई १९९३ को हुआ था। भरतभाई और उषाबेन हार्दिक पटेल के गौरवशाली माता-पिता है। वह अहमदाबाद के वीरमगाम तालुका में स्थित चंदननगरी गांव में रहते है। वह निडर, निर्धारित, दयालु और मजबूत इच्छा शक्ति वाले व्यक्ति के रूप में जाने जाते है। वह समान अधिकारों में विश्वास करते है और वह हमेशा अन्याय के खिलाफ लड़ते है। उन्हें पाटीदार के लिए आरक्षण का लक्ष्य पूरा करने से कुछ भी नही रोक सकता है।
  • आंदोलन के लिए शुरुआती कदम
    सरदार वल्लभभाई पटेल, छत्रपति शिवाजी महाराज, शहिद भगत सिंह और बालासाहेब ठाकरे उनके आदर्श हैं। २०११ में, हार्दिक पटेल उत्तर गुजरात में चल रहे सरदार पटेल ग्रूप (SPG) नामक संगठन में शामिल हुए। हालांकि, उनकी कार्यप्रणाली देखने के बाद, SPG अध्यक्ष ने उन्हें विरमगाम तालुका का अध्यक्ष बनाया। उन्होंने अपने प्रांत में एक मजबूत संगठन का गठन किया और इस आधार पर, उन्होंने सौराष्ट्र के लोगों को इक्काठित करने और जागृति लाना शुरू कर दिया। वे महिला की सुरक्षा, किसानो पे हो रहे अन्याय और युवा बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर लोगों में जागृति लाने शुरू कर दिया था ।
  • एक प्रमुख के रूप में पहली रैली
    पाटीदार से हो रहे इन सभी बाधाओं और अन्यायों को देखते हुए उन्होंने जुलाई २०१५ को मेहसाणा में कलेक्टर को आवेदन पत्र को देने के लिए अपने समुदाय के साथ रैली का आयोजन किया था।  रैली का उद्देश्य OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) श्रेणी में पाटीदार को शामिल करने की मांग थी। २३ जुलाई २०१५ को, उन्होंने विसनगर में कलेक्टर के कार्यालय में आवेदन पत्र देने के लिए अपनी पहली रैली का आयोजन किया 
  • जनता समर्थन
    २५ अगस्त २०१५ को अहमदाबाद में GMDC ग्राउंडमें २५ लाख लोगों की एक सार्वजनिक बैठक का नेतृत्व किया था। उसी दिन बजे, जब पुलिस ने उनको हिरासतमें लिया तब हार्दिक को लोगों के अविश्वसनीय समर्थन मिला और उन्हें १० मिनट के भीतर जमानत पर छोड़ना पड़ा उस बैठक के बाद, गुजरात के ७००० ग्रामीणों ने उन्हें असाधारण सहायता प्रदान कीतब मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने युवा स्वरोजगार योजना के तहत १००० करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा कीलेकिन उन्होंने इस पैकेज को स्वीकार नहीं किया, क्योंकि उनकी प्राथमिक मांग पाटीदार समाज को अन्य पिछड़े वर्ग (OBC) में शामिल करनेका था
  • साहसी व्यक्तित्व
    इसके बाद, उन्होंने सूरत में भयानक लाजपोर मध्यस्थ सेंट्रल जेल में ९ महीने बिताए। इन ९ महीनों के दौरान, सरकार ने उनपे दबाव डालने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। परन्तु वह दृढ थे और उन्होंने ने हार नहीं मानी। अपनी जेल समय के दौरान, उन्होंने गुजरात के लोगों और सभी समुदाय के लोगों को पत्र लिखा था। अपनी कारावास के दौरान, भाजपा ने पंचायत चुनावों में कई असफलताओं और हार का सामना किया।
  • व्यापक प्रतिक्रिया
    १५ जुलाई, २०१६ को जब वह जेल से बाहर आये, तो गुजरात के पांच लाख से ज्यादा लोगों ने उनका स्वागत किया। और फिर उन्होंने गुजरात के २५०० किमी यात्रा और ८ जिलों को कवर करते हुए सिर्फ ४८ घंटे में ४० लाख से अधिक लोगों से मुलाकात की। उनकी एक झलक पाने के लिए राजकोट, मोरबी और अहमदाबाद जैसे शहरों में रात को २ बजे भी लाखो लोगो की भीड़ लगी थी। वह अपने परिवार के लिए उन ४८ घंटे में सिर्फ २० मिनट ही दे पाए थे।
  • घरवापसी
    १७ जनवरी २०१७ उन्होंने गुजरात के बाहर छह महीने पुरे किये, उसी दिन गुजरात और राजस्थान के हजारों युवाओं ने ५००० गाडियो के साथ राजस्थान-गुजरात की सीमा में उनका उत्साहित पूर्वक स्वागत किया था । आज उन्होंने गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, राजस्थान, बिहार, उत्तरप्रदेश और हरियाणा में अपना बड़ा संगठन बना लिया है।
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